गरुड़ ने अपनी चोंच से राम-लक्ष्मण से लिपटे सभी नागों को एक-एक करके काट डाला। गरुड़ नागों के जन्मजात शत्रु हैं — उनकी उपस्थिति मात्र से नागपाश का प्रभाव समाप्त हो गया।
गरुड़ द्वारा नागपाश तोड़ने की विधि अत्यंत सरल थी क्योंकि गरुड़ स्वभावतः नागों के परम शत्रु हैं।
गरुड़ का नाग-शत्रुत्व — भगवान गरुड़ विष्णु के वाहन हैं और सनातन परंपरा में नागों के जन्मजात शत्रु माने जाते हैं।