शिला (पत्थर) बनने का शाप दिया — 'गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।' इन्द्र के छल के कारण शाप मिला। शाप-मुक्ति — भगवान राम के चरण-स्पर्श से। मानस में कारण विस्तार से नहीं बताया।
गौतम ऋषि ने अहल्या को शाप दिया कि वे पत्थर (शिला) की देह धारण करें।
बालकाण्ड में कहा — 'गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर' — गौतम मुनि की स्त्री शापवश पत्थर की देह धारण किये धीरज से (रामजी के चरणों की) प्रतीक्षा कर रही थीं।