विस्तृत उत्तर
गौतम ऋषि ने अहल्या को शाप दिया कि वे पत्थर (शिला) की देह धारण करें। बालकाण्ड में कहा — 'गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर' — गौतम मुनि की स्त्री शापवश पत्थर की देह धारण किये धीरज से (रामजी के चरणों की) प्रतीक्षा कर रही थीं।
पुराणों के अनुसार इन्द्र ने गौतम ऋषि का रूप धारण करके अहल्या से छल किया। गौतम ऋषि ने जानकर अहल्या को शिला बनने का शाप दिया। शाप-मुक्ति का उपाय बताया कि जब त्रेतायुग में भगवान राम तुम्हारे चरण-स्पर्श करेंगे, तब तुम मुक्त होगी।
रामचरितमानस में शाप का कारण विस्तार से नहीं बताया — केवल 'श्राप बस' कहकर संक्षेप में कह दिया।




