भगवद गीता
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गीता के चौथे अध्याय ज्ञानकर्मसंन्यासयोग का सार
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संक्षिप्त उत्तर
चौथा अध्याय: अवतार सिद्धांत, कर्म-अकर्म-विकर्म का रहस्य, ज्ञान की सर्वोच्च महिमा और यज्ञों के विभिन्न प्रकार। ज्ञान अग्नि के समान सभी पापों को जलाता है।
श्रीमद् भगवद गीता का चौथा अध्याय 'ज्ञानकर्मसंन्यासयोग' कहलाता है और इसमें 42 श्लोक हैं।
अध्याय का प्रारंभ: श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि यह योग का ज्ञान उन्होंने सबसे पहले विवस्वान (सूर्यदेव) को दिया था, फिर सूर्यदेव ने मनु को और मनु ने इक्ष्वाकु को।
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