हिंदू दर्शन
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गीता में कृष्ण ने मन को वश में करना कैसे बताया
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संक्षिप्त उत्तर
गीता 6.35 — अभ्यास + वैराग्य से मन वश होता है। अभ्यास = बार-बार मन को विषयों से हटाकर ध्येय पर लाना (6.26)। वैराग्य = विषय भोगों से विरक्ति। सहायक: ध्यान, इंद्रिय निग्रह (कछुआ उदाहरण), सात्विक आहार, ई
मन को वश में करना गीता का केंद्रीय विषय है। अर्जुन ने स्वयं कहा (गीता 6। 34) — 'चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्। ' — मन चंचल, प्रमथन (विचलित) करने वाला, बलवान और दृढ़ है।
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