हिंदू दर्शन
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गीता में तीन गुणों सत्व रज तम का वर्णन
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संक्षिप्त उत्तर
गीता 14: सत्व = ज्ञान, प्रकाश, सुख (ऊर्ध्वगति); रजस् = आसक्ति, कामना, अशांति (मध्य गति); तमस् = अज्ञान, आलस्य, प्रमाद (अधोगति)। तीनों बांधते हैं। गुणातीत = तीनों से परे, समभावी। उपाय: सात्विक आहार, सत
गीता अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग) में तीन गुणों का विस्तृत वर्णन है। प्रकृति (माया) तीन गुणों से बनी है — सत्व, रजस्, तमस्।
सभी प्राणी, कर्म, विचार इन्हीं से प्रभावित हैं। 11): - स्वभाव — प्रकाश, ज्ञान, निर्मलता, सुख, शांति।
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