गीता (2/17-25) के अनुसार आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत और अविनाशी है। शस्त्र इसे काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती। यह देह बदलती है, आत्मा नहीं। यह परमात्मा का सनातन अंश है (15/7)।
गीता में आत्मा का वर्णन गीता अध्याय 2 — आत्मा का सर्वश्रेष्ठ वर्णन: आत्मा के गुण (2/17-25): 1।
अविनाशी: *'अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्। '* (2/17) — जो इस सम्पूर्ण जगत में व्याप्त है, उसे अविनाशी जानो।