गीता अध्याय 6 (ध्यानयोग) के अनुसार नित्य ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है (6/15)। चंचल मन को बार-बार आत्मा में वापस लाना ही ध्यान का अभ्यास है। ध्यान का प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।
गीता में ध्यान का महत्व गीता अध्याय 6 — ध्यानयोग: गीता का छठा अध्याय 'आत्मसंयमयोग' या 'ध्यानयोग' है।
इसमें श्रीकृष्ण ने ध्यान की विधि, महत्व और फल विस्तार से बताए हैं। ध्यान का महत्व — गीता के प्रमुख श्लोक: 1।