भगवद गीता
?
गीता में कर्म योग क्या है?
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
कर्म योग = फल की आसक्ति त्याग कर कर्तव्य-पालन। 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' (2.47)। कोई एक क्षण कर्म-रहित नहीं रह सकता। निष्काम कर्म = मुक्ति। सकाम कर्म = बंधन। 'योगः कर्मसु कौशलम्' — कर्म में
गीता में कर्म योग: 'कर्म' = करना/क्रिया (संस्कृत 'कृ' धातु)। 'योग' = जोड़ना/ईश्वर से मिलन।
कर्म योग = फल की आसक्ति त्याग कर कर्तव्य-पालन करना। मुख्य श्लोक: *'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
📖
सम्पूर्ण उत्तर पढ़ें
शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
पूरा उत्तर पढ़ें →
PAURANIK.ORG