भगवद गीता
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गीता के पांचवें अध्याय कर्मसंन्यासयोग का मूल संदेश
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संक्षिप्त उत्तर
पाँचवें अध्याय का मूल संदेश: कर्मयोग कर्म संन्यास से सुलभ और श्रेष्ठ है। अकर्तापन के भाव से कर्म करो। राग-द्वेष से मुक्त होना ही सच्चा संन्यास है।
श्रीमद् भगवद गीता का पाँचवाँ अध्याय 'कर्मसंन्यासयोग' कहलाता है और इसमें 29 श्लोक हैं।
अर्जुन का प्रश्न: अर्जुन पूछते हैं — 'आप कर्म संन्यास (कर्मों का त्याग) की प्रशंसा करते हैं और फिर कर्मयोग की भी।
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