भगवद गीता
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गीता के तीसरे अध्याय कर्मयोग का सारांश क्या है
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संक्षिप्त उत्तर
तीसरा अध्याय निष्काम कर्म का उपदेश देता है। कर्म अनिवार्य है; फल की आसक्ति छोड़कर यज्ञ भावना से करें। लोकसंग्रह के लिए ज्ञानी को भी कर्म जरूरी। काम ही सबसे बड़ा शत्रु।
श्रीमद् भगवद गीता का तीसरा अध्याय 'कर्मयोग' नाम से जाना जाता है और इसमें 43 श्लोक हैं।
यह अध्याय गीता के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। अध्याय का आरंभ अर्जुन के प्रश्न से होता है।
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