काशी के तीर्थ
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घंटाकर्ण हृद में स्नान और दर्शन की फलश्रुति — स्कंद पुराण
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संक्षिप्त उत्तर
तीन फलश्रुतियाँ — (१) जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति, (२) कहीं भी मरने पर काशी-मरण का पुण्य, (३) सात पीढ़ियों के नरकवासी पितरों का उद्धार। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई इस तीर्थ से तिलांजलि अर्पित करे।
स्कंद पुराण काशी खंड (अध्याय ५३-५४) में घंटाकर्ण हृद में स्नान और घनकर्णेश्वर के दर्शन की तीन अत्यंत दुर्लभ फलश्रुतियाँ वर्णित हैं — पहली — गर्भ-वास से मुक्ति: 'वाराणसी में महोदरेश्वर और घंटाकर्णेश्व
' अर्थात् जन्म-मृत्यु चक्र का अंत — कैवल्य मोक्ष।
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