घंटाकर्ण को मोक्ष कैसे मिला — श्रीकृष्ण और शिव की कथा
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संक्षिप्त उत्तर
शिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं। बदरिकाश्रम में श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण को गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी, अठारह भुजाओं वाला शिवगण बना। आज भी बद्रीनाथ (माणा) में रक्षक देवता के रूप
घंटाकर्ण की मोक्ष-प्राप्ति की कथा हरि-हर एकता का परम प्रमाण है। भगवान शिव उसकी घोर तपस्या से प्रसन्न हुए और दर्शन दिए।
जब घंटाकर्ण ने मोक्ष का वरदान माँगा, तो शिव ने स्पष्ट कहा कि मोक्ष देने का सामर्थ्य केवल भगवान विष्णु (कृष्ण) में है।