संध्या काल में दीपक लक्ष्मी आगमन, अंधकार निवारण और संधि काल की शुभ ज्योति का प्रतीक है। सूर्यास्त पर मुख्य द्वार और पूजा स्थल में घी/तेल का दीपक जलाएं। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' — यह परंपरा अंधकार से प्रक
संध्या काल (सूर्यास्त के समय) मुख्य द्वार पर दीपक जलाना सनातन धर्म की अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपरा है। शास्त्रीय कारण: 1।
संध्या वंदन — सूर्यास्त का समय संधि काल (दिन और रात का मिलन) है। इस समय देवताओं और पितरों दोनों का आह्वान होता है।