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पूजा विधि📜 स्कंद पुराण, धर्मसिंधु, लोक परंपरा2 मिनट पठन

घर के मुख्य द्वार पर शाम को दीपक क्यों रखते हैं

संक्षिप्त उत्तर

संध्या काल में दीपक लक्ष्मी आगमन, अंधकार निवारण और संधि काल की शुभ ज्योति का प्रतीक है। सूर्यास्त पर मुख्य द्वार और पूजा स्थल में घी/तेल का दीपक जलाएं। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' — यह परंपरा अंधकार से प्रकाश की याचना है।

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विस्तृत उत्तर

संध्या काल (सूर्यास्त के समय) मुख्य द्वार पर दीपक जलाना सनातन धर्म की अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपरा है।

शास्त्रीय कारण

  1. 1संध्या वंदन — सूर्यास्त का समय संधि काल (दिन और रात का मिलन) है। इस समय देवताओं और पितरों दोनों का आह्वान होता है। दीपक इस संधि काल की शुभ ज्योति है।
  1. 1लक्ष्मी आगमन — लोक परंपरा और कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार संध्या काल में लक्ष्मी जी विचरण करती हैं। जिस घर में ज्योति जलती है, वहां लक्ष्मी प्रवेश करती हैं।
  1. 1अंधकार निवारण — दीपक अंधकार (अज्ञान, नकारात्मकता) को दूर करता है। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' (बृहदारण्यक उपनिषद) — अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाओ।
  1. 1पितृ तर्पण — संध्या काल में पितरों का स्मरण होता है। दीपक उन्हें मार्ग दिखाता है।

व्यावहारिक कारण

  • प्राचीन काल में विद्युत नहीं थी। द्वार पर दीपक घर आने वालों को मार्ग दिखाता था।
  • कीट-पतंगों को आकर्षित कर घर के अंदर जाने से रोकता था।

दीपक जलाने की विधि

  1. 1सूर्यास्त से थोड़ा पहले या ठीक सूर्यास्त पर जलाएं।
  2. 2घी या सरसों तेल का दीपक।
  3. 3मुख्य द्वार की दहलीज पर या द्वार के दोनों ओर रखें।
  4. 4पूजा स्थल में भी संध्या दीप जलाएं।
  5. 5तुलसी के पौधे के पास भी दीपक जलाना शुभ है।

दीप मंत्र

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते।।
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शास्त्रीय स्रोत
स्कंद पुराण, धर्मसिंधु, लोक परंपरा
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