घर में मंदिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाएं — यह सर्वोत्तम है। देवता का मुख पूर्व की ओर हो। शयन कक्ष और दक्षिण दिशा में मंदिर न बनाएं। मूर्ति की ऊँचाई हृदय के समांतर या ऊपर हो। खंडित मूर्ति घर में न
घर में मंदिर स्थापना के नियम वास्तु शास्त्र, मानसार और धर्म सिंधु में विस्तार से वर्णित हैं: मंदिर का सही स्थान (वास्तु शास्त्र के अनुसार): 1।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — सर्वोत्तम: ईशान = ईश (शिव) + आन (स्थान) — यह शिव और देवताओं की दिशा है।