गीता ज्ञान
?
गीता श्लोक 18.66 — सर्वधर्मान्परित्यज्य — अर्थ क्या?
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
गीता 18.66 (चरम श्लोक): 'सब छोड़कर मेरी शरण आ, मैं तुझे सभी पापों से मुक्त करूँगा, शोक मत कर।' रामानुज: गीता का सर्वोच्च श्लोक — प्रपत्ति (शरणागति) का परम उपदेश। गीता का सबसे आश्वस्त करने वाला वचन।
66 को 'चरम श्लोक' (अंतिम/सर्वोच्च श्लोक) कहा जाता है — रामानुजाचार्य ने इसे गीता का सबसे महत्वपूर्ण श्लोक माना।
मूल श्लोक: *सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
📖
सम्पूर्ण उत्तर पढ़ें
शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
पूरा उत्तर पढ़ें →
PAURANIK.ORG