गीता ज्ञान
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गीता के 15वें अध्याय — पुरुषोत्तम योग क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग — 20 श्लोक): संसार = उल्टा अश्वत्थ वृक्ष। जीवात्मा ईश्वर का अंश (15.7)। तीन पुरुष: क्षर (नाशवान), अक्षर (अविनाशी), पुरुषोत्तम (सर्वोच्च परमात्मा)। 'इसे जानने वाला सर्वज्ञ' (1
गीता का 15वाँ अध्याय 'पुरुषोत्तम योग' है — इसमें केवल 20 श्लोक हैं परंतु यह गीता के सबसे गहन अध्यायों में से एक है।
20) में स्वयं कहा गया: *'इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ'* — यह सबसे गोपनीय शास्त्र मैंने कहा।
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