अध्याय 2 (सांख्य योग): (1) आत्मा अमर — 'न जायते म्रियते वा कदाचिन्' (2.20), (2) कर्मयोग — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' (2.47), 'समत्वं योग' (2.48), (3) स्थितप्रज्ञ — सुख-दुख में समभाव (2.55-56)। गीता के लगभग
गीता का दूसरा अध्याय 'सांख्य योग' है — इसमें 72 श्लोक हैं और यह गीता का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है क्योंकि इसमें गीता के लगभग सभी मुख्य सिद्धांतों का बीज है।