अन्त्येष्टि संस्कार
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गंगा में अस्थि विसर्जन का क्या विशेष महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
गंगा अस्थि: मोक्षदायिनी (गरुड़ पुराण), विष्णु पादोदक (चरण स्पर्श), पापनाश, पुनर्जन्म मुक्ति। स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, काशी (शिव तारक मंत्र), गंगासागर। 3-10 दिन में। 'ॐ' सहित विसर्जन→तर्पण→पिण्डदान।
गंगा में अस्थि (हड्डियाँ/राख) विसर्जन हिन्दू धर्म में मोक्ष प्रदायिनी क्रिया मानी गई है: 1।
गंगा = मोक्षदायिनी: गरुड़ पुराण: 'गंगायां यस्य अस्थीनि तिष्ठन्ति। ' — जिसकी अस्थियाँ गंगा में हैं, वह मोक्ष प्राप्त करता है।
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