गरुड़ पुराण के अनुसार गोघाती को विशेष रूप से वैतरणी नदी में फेंका जाता है जहाँ घड़ियाल, विषधर सर्प और गिद्ध उसे नोचते हैं। इसके अलावा 'महावीचि' नरक में रक्त के गड्ढे में डाला जाता है और काँटे चुभाए जा
गरुड़ पुराण में गौहत्या को महापापों में सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
इसका कारण यह है कि गाय को सनातन धर्म में माता का दर्जा प्राप्त है और उसमें समस्त देवताओं का वास माना गया है।