हाँ — कुंडली=प्रारब्ध कर्म(पूर्व जन्म)। 3 कर्म: संचित/प्रारब्ध(कुंडली)/क्रियमाण(वर्तमान)। वर्तमान कर्म=प्रारब्ध बदल सकता। 'अपना उद्धार स्वयं करो'(गीता)। कुंडली=संकेत, निर्णय नहीं।
हाँ — ज्योतिष+वेदांत दोनों अनुसार। शास्त्रीय आधार: जन्म कुंडली = प्रारब्ध कर्म (पूर्व जन्म के संचित कर्मों का वह भाग जो इस जन्म में फलित)।
ग्रह स्थिति = प्रारब्ध कर्मों का ज्योतिषीय चित्र। 3 प्रकार कर्म: 1। संचित = सभी जन्मों के कुल कर्म।