ग्रहण भोजन वर्जित: धार्मिक — सूतक/अशुद्धि काल, पुण्यकाल में जप-तप करें। व्यावहारिक — सूक्ष्मजीव वृद्धि, पाचन प्रभाव, उपवास लाभ। सुरक्षा: पूर्व भोजन में तुलसी डालें, बाद में ताजा बनाएँ। रोगी/गर्भवती को
ग्रहण काल में भोजन न करने का विधान शास्त्रों में स्पष्ट है। इसके पीछे धार्मिक और व्यावहारिक दोनों कारण हैं: धार्मिक कारण: 1।
सूतक (अशुद्धि काल): ग्रहण काल सूतक (वेध) काल है — इस समय वातावरण अशुद्ध माना जाता है।