ग्रहण विधि
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ग्रहण काल में दान करने से पुण्य कई गुना क्यों बढ़ता है?
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संक्षिप्त उत्तर
ग्रहण दान: पुण्यकाल (करोड़गुना — स्मृति), सन्धि काल=कर्मफल तीव्र, अशुद्धि में त्याग=अधिक पुण्य। तिल, अन्न, वस्त्र, ताँबा/चाँदी। ग्रहण मोक्ष समय सर्वोत्तम।
ग्रहण दान = अनेकगुना पुण्य: 1। पुण्यकाल: ग्रहण = ब्रह्माण्डीय ऊर्जा असामान्य। शुभ कर्म = करोड़गुना।
स्मृति: 'ग्रहणे दत्तं दानं कोटिगुणं भवेत्। सन्धि काल: सूर्य/चन्द्र पर संक्रमण = ऊर्जा तीव्र = कर्मफल तीव्र।
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