ग्रहण में कुश: कुश = सर्वाधिक पवित्र तृण, सात्विक ऊर्जा। भोजन/जल पर रखने से ग्रहण का दूषित प्रभाव निष्प्रभ। तुलसी पत्र भी साथ। कुश पवित्री पहनकर जप। मान्यता: कुश नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित करता है। बिना
सूर्य/चन्द्र ग्रहण काल में भोजन, जल, औषधि आदि पर कुश (दर्भ) घास रखने की प्राचीन परम्परा है।
शास्त्रीय: कुश (दर्भ) को सनातन धर्म में सर्वाधिक पवित्र तृण (घास) माना गया है। इसमें सात्विक ऊर्जा और रक्षात्मक गुण हैं।