ग्रहण विधि
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ग्रहण काल में पूजा और जप कैसे करें?
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संक्षिप्त उत्तर
ग्रहण काल: स्नान → जप (सर्वोत्तम कर्म, करोड़गुना फल)। सूर्य ग्रहण: सूर्य मंत्र/गायत्री। चन्द्र ग्रहण: चन्द्र मंत्र/महामृत्युंजय। इष्ट मंत्र जप। मोक्ष पर: पुनः स्नान → दान → पूजा। भोजन में तुलसी डालें।
ग्रहण काल (सूर्य या चन्द्र ग्रहण) को शास्त्रों में पुण्यकाल माना गया है — इस समय किया गया जप-दान करोड़ गुना फल देता है।
ग्रहण काल में जप-पूजा विधि: 1। स्नान: ग्रहण स्पर्श (आरम्भ) होते ही स्नान करें।
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