ग्रहण विधि
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ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट क्यों बंद कर देते हैं?
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संक्षिप्त उत्तर
कपाट बंद: सूतक (गर्भगृह सुरक्षा), राहु-केतु कवच, दर्शन वर्जित, पुनः शुद्धि बाद खुलें। भक्त=बाहर जप (करोड़गुना)। कुछ दक्षिण मंदिर=अपवाद।
मंदिर कपाट बंद: 1। सूतक: अशुद्ध वातावरण में गर्भगृह = मूर्ति सुरक्षित रखना। राहु-केतु: नकारात्मक ऊर्जा = मूर्ति कवच।
पूजा/दर्शन वर्जित: सूतक में मूर्ति दर्शन (कुछ परम्पराओं में) वर्जित। पुनः शुद्धि: ग्रहण बाद मूर्ति स्नान + नवीन भोग → तब कपाट।
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