गृहस्थ धर्म
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गृहस्थ मृत्यु तैयारी कैसे करें आध्यात्मिक
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संक्षिप्त उत्तर
नियमित भक्ति=अंतिम स्मरण natural। गीता 8.5: 'अंतिम स्मरण=गति।' वसीयत/ऋण चुकाएं/क्षमा/दान। शरीर=कपड़ा बदलना। अच्छे कर्म+ईश्वर स्मरण=daily तैयारी।
मृत्यु = निश्चित; तैयारी = बुद्धिमत्ता (गीता 2। आध्यात्मिक: नियमित भक्ति/जप = अंतिम समय ईश्वर स्मरण natural।
5-6: 'अंतिम समय जो स्मरण, वही गति। ' इसलिए जीवनभर अभ्यास। व्यावहारिक: वसीयत बनाएं (परिवार झगड़ा रोकें)। क्षमा मांगें+दें (बोझ न रहे)।
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