हाँ, गृहस्थ जीवन में मोक्ष संभव है। राजा जनक इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं। फल की आसक्ति छोड़कर, ईश्वर को समर्पित होकर निष्काम कर्म करने से गृहस्थ भी जीवनमुक्त हो सकता है।
हाँ, गृहस्थ जीवन में भी मोक्ष पूर्णतः संभव है — यह सनातन शास्त्रों का स्पष्ट मत है।
गृहस्थाश्रम को 'प्रवृत्ति मार्ग' कहा जाता है, जिसमें सांसारिक जिम्मेदारियाँ निभाते हुए मुक्ति प्राप्त की जाती है।