तुलसीदासजी ने गुरु के चरणकमलों की रज को किसका सुन्दर चूर्ण कहा है?
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संक्षिप्त उत्तर
गुरु के चरणों की रज को 'अमिअ मूरिमय चूरन चारू' अर्थात् अमृत मूल (संजीवनी जड़ी) का सुन्दर चूर्ण कहा गया है, जो सम्पूर्ण भवरोगों (संसार के दुखों) के परिवार को नष्ट करने वाला है।
तुलसीदासजी ने गुरु के चरणकमलों की रज को 'अमिअ मूरिमय चूरन चारू' अर्थात् अमर मूल (संजीवनी जड़ी) का सुन्दर चूर्ण कहा है।
चौपाई है — 'बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा। अमिअ मूरिमय चूरन चारू।