गुरु वह है जो अज्ञान के अंधकार को हटाकर ज्ञान का प्रकाश देता है। शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तुल्य माना गया है। मुण्डकोपनिषद के अनुसार ब्रह्मज्ञान के लिए वेदज्ञाता और ब्रह्मनिष्ठ
गुरु का स्वरूप और महत्व 'गु' का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' का अर्थ है प्रकाश (ज्ञान)।
इस प्रकार गुरु का अर्थ है — *अज्ञान के अंधकार को नष्ट करके ज्ञान का प्रकाश देने वाला।