चप्पल नहीं: गुरु सम्मान (विनम्रता), पृथ्वी=गुरु चरण (अपमान न हो), तप (कष्ट=गुरु सेवा), Earthing, अहंकार त्याग। कठोर नियम नहीं — भावना महत्वपूर्ण। 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...'
गुरु पूर्णिमा (आषाढ़ पूर्णिमा) पर चप्पल न पहनने की परम्परा: 1। गुरु सम्मान: गुरु = ब्रह्म (गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः।
गुरु पूर्णिमा = गुरु चरणों का दिन। नंगे पैर = परम विनम्रता = 'गुरुदेव, मैं आपके चरणों का दास हूँ।