इसकी कथा एक कंजूस रानी की है जिसने गुरुवार को बाल और कपड़े धोकर अपना सारा धन नष्ट कर दिया था। बाद में उसने 16 गुरुवार व्रत रखकर और चने की दाल-गुड़ का भोग लगाकर अपना खोया धन वापस पाया।
व्रत की दो प्रमुख कथाएँ हैं। पहली कथा में देवराज इंद्र ने अहंकारवश गुरु बृहस्पति का अपमान किया, जिससे उनका राजपाट छिन गया।
ब्रह्मा जी के कहने पर उन्होंने गुरुवार व्रत कर गुरु को प्रसन्न किया और स्वर्ग वापस पाया।