दक्षिणामूर्ति साधना
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ज्ञान मुद्रा का मतलब क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
तर्जनी और अंगूठे का मिलन जीवात्मा और परमात्मा के एक होने का प्रतीक है जिसे ज्ञान मुद्रा कहते हैं।
दक्षिणामूर्ति स्वरूप में शिव दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगूठे को मिलाकर ज्ञान मुद्रा (या चिन-मुद्रा) धारण करते हैं।
यह मुद्रा जीवात्मा (तर्जनी) और परमात्मा (अंगूठा) के मिलन, यानी अद्वैत तत्त्व को दर्शाती है।
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