शिव ने हलाहल इसलिए पिया क्योंकि उनकी अनंत करुणा थी और वे सृष्टि के स्वामी हैं। कोई अन्य देव या दानव उस विष को ग्रहण करने में सक्षम नहीं था। शिव जी की योगशक्ति और दिव्य देह ही उसे धारण कर सकती थी।
भगवान शिव ने हलाहल विष पीने के लिए स्वयं आगे आए — इसके पीछे उनकी अनंत करुणा और लोककल्याण की अदम्य भावना थी।
जब हलाहल की ज्वाला से समस्त जीव-जगत संकट में पड़ा और न देवता, न असुर, न कोई अन्य प्राणी उस विष को ग्रहण करने में सक्षम था, तब सभी देवता भयभीत होकर भगवान शिव के पास दौड़े और करबद्ध होकर उनसे सृष्टि की