हनुमानजी ने राम-नाम जपने वाले राजा की रक्षा की और स्वयं श्रीराम का बाण उसे नहीं छू सका। तब विश्वामित्र ने कहा — 'जो बल राम के नाम में है, वह खुद राम में नहीं है।' यह प्रसंग राम-नाम की अपराजेय शक्ति का
राम नाम की अपराजेय शक्ति दिखाने वाला सबसे प्रसिद्ध प्रसंग वह है जब हनुमानजी ने स्वयं श्रीराम को परास्त कर दिया।
कथा — एक बार विश्वामित्र ऋषि ने श्रीराम से एक दुष्ट राजा को मारने का वचन लिया। राजा ने हनुमानजी की शरण ली।