हनुमान चालीसा के नित्य पाठ से — रोग और पीड़ा नष्ट होती है, भूत-प्रेत दूर रहते हैं, शनि पीड़ा कम होती है, मानसिक बल और साहस बढ़ता है, और राम जी की कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार-शनिवार को 3 या 7 बार पाठ
हनुमान चालीसा के नित्य पाठ के फल का वर्णन स्वयं तुलसीदास जी ने चालीसा में किया है और हनुमान पुराण में भी इसका विस्तार मिलता है: हनुमान चालीसा का परिचय: - रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास जी (16वीं शताब्दी)
सभी कष्टों से मुक्ति: > 'नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥' — निरंतर जप से सभी रोग और पीड़ाएं नष्ट होती हैं।