हरे कृष्ण महामंत्र का स्रोत 'कलि-संतरण उपनिषद' है। इसमें ब्रह्माजी ने नारद को बताया कि कलियुग में 16 नामों का यह महामंत्र ही एकमात्र उपाय है। 15वीं सदी में चैतन्य महाप्रभु ने इसे जन-जन तक पहुँचाया।
हरे कृष्ण महामंत्र का मूल स्रोत 'कलि-संतरण उपनिषद' है — यह वैदिक उपनिषद परंपरा का ग्रंथ है जो कृष्ण यजुर्वेद के अंतर्गत आता है।
महामंत्र है — 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।