हर की पौड़ी = ईश्वर की सीढ़ियाँ, ब्रह्मकुंड, अमृत बूँदें गिरीं, विष्णु पदचिह्न। गंगा आरती = सूर्यास्त, बड़े दीपक, अलौकिक। सप्त पवित्र, कुंभ स्थल, स्नान = मोक्ष।
हर की पौड़ी = हरिद्वार का मुख्य घाट — 'हर' (ईश्वर) + 'की' + 'पौड़ी' (सीढ़ियाँ) = ईश्वर की सीढ़ियाँ।
यहीं गंगा पहाड़ छोड़कर मैदान में प्रवेश करती है। मान्यता: समुद्र मंथन में अमृत की बूँदें यहीं गिरीं — इसे ब्रह्मकुंड भी कहते।