हर की पैड़ी/गंगा घाट → पंडा से संपर्क → गंगा स्नान → मंत्रोच्चार → तिल-जल तर्पण → अस्थि गंगा में → पिंडदान → दान। पंडा कुल रजिस्टर रखता है। विश्वसनीय पंडा चुनें; पर्यावरण अनुकूल विसर्जन।
हरिद्वार = गंगा का मैदानी क्षेत्र प्रवेश; अस्थि विसर्जन का प्रमुख तीर्थ। हर की पैड़ी या अन्य गंगा घाट पर जाएं।
पंडा/पुरोहित — हरिद्वार के स्थानीय पंडा (कुल पुजारी) से संपर्क। अनेक परिवारों के पीढ़ियों के रिकॉर्ड इनके पास।