हवन/यज्ञ
?
हवन में स्वाहा बोलने का क्या अर्थ है?
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
'सु+आहा'='अच्छी तरह अर्पित।' अग्नि=देवमुख, स्वाहा=अग्नि पत्नी (पुराण)। 'हे अग्नि, देवता तक पहुंचाओ!' 'इदं न मम'='मेरा नहीं'=समर्पण। बिना स्वाहा=अधूरी।
'स्वाहा' = अग्नि देवता मुख — अर्थ: व्युत्पत्ति: - 'सु' + 'आहा' = 'अच्छी तरह कहा/अर्पित किया। ' - या: 'स्व' + 'आहा' = 'स्वयं को अर्पित।
अग्नि = देवमुख: अग्नि = देवताओं का मुख। 'स्वाहा' = 'हे अग्नि, यह देवता तक पहुंचाओ!' 2।
📖
सम्पूर्ण उत्तर पढ़ें
शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
पूरा उत्तर पढ़ें →
PAURANIK.ORG