भक्ति ईश्वर के प्रति परम, निष्काम प्रेम है। भागवत पुराण में प्रह्लाद द्वारा बताई नवधा भक्ति — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पाद-सेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्म-निवेदन — भक्ति के नौ रूप हैं।
हिंदू धर्म में भक्ति क्या है? भक्ति की परिभाषा: नारद भक्ति सूत्र में कहा गया है — *'सा त्वस्मिन् परमप्रेमरूपा'* — ईश्वर के प्रति परम प्रेम ही भक्ति है।
भक्ति में ज्ञान और वैराग्य स्वयं समाहित हो जाते हैं। नवधा भक्ति (भागवत 7/5/23-24) — प्रह्लाद-उपदेश: 1। श्रवण — भगवान की कथा-लीला का श्रवण 2।