ईश्वर एक है, रूप अनेक। ऋग्वेद (1.164.46): 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति' — सत्य एक, नाम अनेक। श्वेताश्वतर: 'एको देवः सर्वभूतेषु गूढः।' निर्गुण ब्रह्म एक, सगुण रूप (ब्रह्मा/विष्णु/शिव) अनेक — सब उसी की
यह हिंदू दर्शन का एक गहन प्रश्न है। संक्षिप्त उत्तर: ईश्वर एक ही है, पर उसके रूप अनेक हैं। वैदिक प्रमाण: ऋग्वेद (1।
46): *'एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति'* — सत्य (ईश्वर) एक ही है, विद्वान उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।