वेद-उपनिषद का संदेश — 'एकं सत्', 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि' — सभी जीवों में एक ही आत्मा। गीता में समदर्शन। वर्ण गुण-कर्म पर आधारित, जन्म पर नहीं। भक्ति परंपरा में शबरी, कबीर, रैदास जैसे उदाहरण।
हिंदू धर्म में समानता का सिद्धांत गहरे आध्यात्मिक आधार पर टिका हुआ है।
यह केवल सामाजिक समता की बात नहीं करता, बल्कि आत्मिक एकता के सत्य को उद्घाटित करता है।