ईर्ष्यालु को — रौरव नरक (अग्नि-यातना), निंदा पर संधांश नरक (नाखूनों से खरोंचना), दूसरों के कलह में प्रसन्नता पर नरक। ईर्ष्यालु का जीवन दुखी — पुनर्जन्म में अभाव।
गरुड़ पुराण में ईर्ष्या को एक ऐसा दोष माना गया है जो अनेक पापों की जड़ है।
रौरव नरक — 'स्वार्थी, लालची और ईर्ष्यालु तथा दूसरों के संसाधनों पर ऐश करने वाले लोगों की आत्मा को रौरव नरक में भेजा जाता है।