ईशोपनिषद (18 मंत्र) का सार — मंत्र 1: 'ईशावास्यमिदं सर्वं' — सब में ईश्वर। 'तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा' — त्यागपूर्वक भोग करो। 'मा गृधः' — लोभ मत करो। कर्म + ज्ञान दोनों आवश्यक। गांधी: 'केवल पहला मंत्र बचे
ईशावास्य उपनिषद (ईशोपनिषद) शुक्ल यजुर्वेद का अंतिम (40वां) अध्याय है। यह एकमात्र उपनिषद है जो सीधे वेद संहिता का भाग है।
केवल 18 मंत्र हैं, परंतु इनमें संपूर्ण वेदांत का सार है। प्रथम मंत्र (1) — उपनिषद का सार: 'ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।