भक्ति एवं आध्यात्म
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जब बहुत दुखी हों तो भगवान को कैसे मनाएँ?
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संक्षिप्त उत्तर
दुख में भगवान के सामने सच्चे मन से रोएँ, नाम जपें, शरणागति के भाव से कहें — 'मैं तुम्हारा हूँ'। गीता (18.66) में कृष्ण कहते हैं — केवल मेरी शरण आओ, शोक मत करो। प्रह्लाद, शबरी और कुंती — सभी के दुख में
जब हृदय गहरे दुख में डूबा हो, तब भगवान सबसे निकट होते हैं — यह बात सभी भक्त-कवियों और शास्त्रों ने कही है।
भगवान को 'मनाना' नहीं पड़ता — उन तक पहुँचना पड़ता है, और उस पहुँच का रास्ता दुख के समय सबसे खुला होता है।
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