जैन धर्म में ५२ वीरों में एक — पूर्वजन्म में क्षत्रिय राजा तुंगभद्र। महुड़ी (गुजरात) प्रमुख तीर्थ। हिंदू घंटाकर्ण (पिशाच से शिवगण) से भिन्न सत्ता, पर दोनों में 'उग्र रक्षक देवता' की समान छवि।
जैन धर्म में 'घंटाकर्ण महावीर' ५२ वीरों (रक्षक देवों) में से एक हैं।
जैन परंपरा के अनुसार वे पूर्वजन्म में श्रीनगर के एक पुण्यात्मा क्षत्रिय राजा 'तुंगभद्र' थे, जिन्होंने तीर्थयात्रियों की रक्षा करते हुए प्राण त्यागे।