गंगाजल महत्त्व: गंगा = शिव-जटा-विनिर्गता (शिव के माथे से उतरी)। स्कंद पुराण: गंगाजल अभिषेक से सर्व-जन्म-पाप नाश। पितृ-मोक्ष। देवी भागवत: 68 तीर्थों का फल। काशी में विश्वनाथ पर गंगाजल = मोक्ष। गंगाजल न
गंगाजल को शिवाभिषेक में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है — इसके कारण शास्त्रों में बहुत स्पष्ट हैं।
गंगा और शिव का अभिन्न संबंध: वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड): भगीरथ की तपस्या से गंगा स्वर्ग से उतरी, किंतु उनके वेग को थामने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया।