विस्तृत उत्तर
गंगाजल को शिवाभिषेक में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है — इसके कारण शास्त्रों में बहुत स्पष्ट हैं।
गंगा और शिव का अभिन्न संबंध
वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड): भगीरथ की तपस्या से गंगा स्वर्ग से उतरी, किंतु उनके वेग को थामने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया। इसीलिए गंगा को 'जाह्नवी' और 'शिव-जटा-विनिर्गता' कहा जाता है। गंगा सर्वप्रथम शिव के माथे पर थीं — वे शिव की अर्धांगिनी हैं।
गंगाजल के विशेष गुण
1सर्व-पापनाशिनी
स्कंद पुराण (काशी खंड): 'गंगाजलं परं तीर्थं...' — गंगाजल से शिवाभिषेक करने पर सभी जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
2पितृ-मोक्ष
गंगाजल से शिवाभिषेक करने पर पितरों को मोक्ष मिलता है — यह श्राद्ध-कर्म जितना फलदायक।
3सर्व-तीर्थ-फल
देवी भागवत: गंगाजल = सभी 68 तीर्थों का संयुक्त फल।
4काशी में विशेष महत्त्व
काशी विश्वनाथ पर गंगाजल अभिषेक = सर्वोच्च पुण्य — मोक्ष-प्रदायक।
व्यावहारिक: यदि गंगाजल उपलब्ध न हो, तो शुद्ध जल में गंगाजल की कुछ बूँदें मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।





